मेरा आँगन

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Friday, January 27, 2012

किचन की रानी


-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

गुड़िया रानी बनी सयानी
कुछ  करके  दिखलाएगी ।
किचन का सभी काम सँभाला
दाल और भात पकाएगी ॥

15 comments:

KAHI UNKAHI said...

इस नन्हीं सी ‘मास्टर शेफ़’ को देख कर, साथ में एक प्यारी सी कविता पढ़ कर मन खुश हो गया...।

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर रचना। धन्यवाद।

मेरा साहित्य said...

kya baat hai vo dal bhat to me bhi khaungi.
sunder chitr ke sath pyari kavita
rachana

amita kaundal said...

प्यारी सी गुडिया बहुत सुंदर है और साथ सुंदर रचना
धन्यवाद.
सादर
अमिता

anju(anu) choudhary said...

आने वाले कल की है ये कहानी

manukavya said...

अरे वाह ! गुडिया रानी तो बहुत प्यारी लग रहीं हैं... अब इतना अच्छा दाल-भात कौन छोड़ेगा, हमारा भी हिस्सा रखियेगा.


प्यारी सी गुडिया का प्यारा सा खाना
तो कौन न होगा इसका दीवाना
पापा जी, मम्मी जी, दादा जी दादी जी
सबके संग मेरी भी थाली लगाना
गरमागरम दाल-भात सबको खिलाना

गुडिया रानी को ढेरों-ढेर आशीष सहित
सादर
मंजु

manukavya said...

अरे वाह ! गुडिया रानी तो बहुत प्यारी लग रहीं हैं... अब इतना अच्छा दाल-भात कौन छोड़ेगा, हमारा भी हिस्सा रखियेगा.


प्यारी सी गुडिया का प्यारा सा खाना
तो कौन न होगा इसका दीवाना
पापा जी, मम्मी जी, दादा जी दादी जी
सबके संग मेरी भी थाली लगाना
गरमागरम दाल-भात सबको खिलाना

गुडिया रानी को ढेरों-ढेर आशीष सहित
सादर
मंजु

युग-चेतना said...

वाह ! इस मासूम गुडिया के हाथ का खाना तो अमृत ही होगा |

vandana said...

vaah nanhi chef

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

वाह!

डॉ. जेन्नी शबनम said...

bahut pyari rachna, gudiya rani ka sach bhi hai ki dheere dheere sara kaam karne lagti hai.

त्रिवेणी said...

ਮਨ ਖੁਸ਼ ਹੋ ਗਿਆ.........ਪਿਆਰੀ ਗੁੜੀਆ ਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ........ਬੁੱਲਾਂ ਦੇ ਹਾਸੇ ਨਾਲ਼ ਦਿਲ ਵੀ ਹੱਸ ਪਿਆ !

ਹਰਦੀਪ

veerubhai said...

बहुत बढ़िया बाल रचना भावपूर्ण सरस .

Dr.Priya said...

अरे नही...इस नन्ही को कुछ पकाने की क्या जरूरत यह तो यूँ ही मन मोह लेगी...

Dr.Bhawna said...

अरे ! नन्हीं शेफ तो बहुत प्यारी लग रही है, रचना ने चार चाँद लगा दिए हैं...