मेरा आँगन

मेरा आँगन

Thursday, December 15, 2011

ओ मेरी मैया !



-रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’
बात सुनो  ओ मेरी मैया !
ला दो मुझको ,सोनचिरैया
उसको दाना ,रोज़ खिलाऊँ
जीभर उससे ,मैं बतियाऊँ
उड़ना सीखूँ,मैं भी उससे
उसको मैं हँसना सिखलाऊँ
-0-

7 comments:

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

क्या खूबसूरत लिखा है!

Dr.Bhawna said...

Sonchiraiya par bahut payari rachna...

Naveen Mani Tripathi said...

bal mn ke taron pakdane me behad kamyab hai ap achhi rachna ke liye ...abhar.

vandana said...

bahut achchha balgeet

avanti singh said...

उड़ना सीखूँ,मैं भी उससे
उसको मैं हँसना सिखलाऊँ.....waah! bahut khub.....

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बढिया है

कविता रावत said...

उड़ना सीखूँ,मैं भी उससे
उसको मैं हँसना सिखलाऊँ
...sundar baal sulabh rachna..