मेरा आँगन

मेरा आँगन

Tuesday, December 6, 2016

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1-डॉ.गोपाल बाबू शर्मा
1-मुस्काना सीखो

सुन्दर खिले हुए फूलों से,
तुम हँसना-मुस्काना सीखो।
रंग-बिरंगे फूलों जैसा,
जीवन सुघर बनाना सीखो।
सदा दूसरों की राहों में,
खुशी-खुशी बिछ जाना सीखो।
काँटों से घबराना कैसा,
दुख में भी इठलाना सीखो।
अच्छे कामों की खुशबू से,
तुम जग को महकाना सीखो।
यों ही झर जाने में क्या है,
कुछ करके दिखलाना सीखो।
-0-
2-काठ का घोड़ा

यह मत समझो ऐंठा हूँ मैं,
बस घोड़े पर बैठा हूँ मैं।
भले काठ का घोड़ा मेरा
मगर ठाठ का घोड़ा मेरा।
नहीं माँगता दाना-पानी,
फिर भी इस पर रहे जवानी।
एक सीट मैंने हथिया ली,
लेकिन अभी दूसरी ख़ाली।
आना है तो जल्दी आओ,
मेरे पीछे तुम जम जाओ।
है ऐसा अलबेला घोड़ा,
नहीं चाहिए इसको कोड़ा।
जिधर कहोगे उधर मुड़ेगा,
आसमान तक खूब उड़ेगा।
-0-[ जन्म-4 दिसम्बर, 1932, अलीगढ़, विभिन्न विधाओं की तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित,अलीगढ़ के महाविद्यालय से हिन्दी विभाग के रीडर पद से सेवा निवृत्त]
2-सुनीता काम्बोज
1-तितली बड़ी सयानी

तितली बड़ी सयानी है
ये फूलों की रानी है

नहीं पकड़ में आती है
झट से ही उड़ जाती है

फूलों से बतियाती है
क्यों हमसे डर जाती है

पास हमारे भी आओ
सखा हमारी बन जाओ

तुमको नहीं सताएँगे
आओ गीत सुनाएँगे
-0-
2- मूँगफली ओ मूँगफली

 मूँगफली ओ मूँगफली
कहा चली तू कहाँ चली

सर्दी में तू आती है
गर्मी में छुप जाती है

गर्म रेत में सिकती है
धरती में तू उगती है

सबके मन को भाती है
खोल पहन इतराती है
-0-
1-जब आये भोर

खिले कमल जब आये भोर।
उड़कर पंछी करते शोर।

धीरे-धीरे आती धूप।
झाँक झील में देखे रूप।

उड़-उड़ कौआ ढूँढ़ें छाँव
बैठ नीम पर करता काँव।

चिड़िया ढूँढे रोशनदान
तिनके रखकर गाती गान।

बादल देख नाचते मोर।
गरज-गरज बरखा घनघोर।

देख -देख बच्चों का चाव
तैर रही कागज़ की नाव।

जगमग जुगनू बना कतार
चमके ज्यों हीरों का हार।

नानी करे परी की बात।
आती जब तारों की रात।
-0-
2- ओढ़ लबादा

ओढ़ लबादा बादल वाला
क्यों बैठे हो सूरज भैया
हाड़ कँपाती सर्दी से क्या
तुम ऐंठे हो सूरज भैया।

जल्दी जल्दी घर जाते हो
मम्मी ने क्या डाँट पिलाई
या फिर अच्छा लगता तुमको
सोते रहना ओढ़ रजाई।

भूले रहना रबड़ी कुल्फी
दूध जलेबी खूब मिलेगी।
मीठी-मीठी गुड़ की भेली
चखना तुमको खूब जमेगी।

खिली-खिली सुंदर बगिया में
आओ जरा देर हम खेलें।
धूप गुनगुनी लगे सुहानी
जरा मजे इसके भी ले लें
-0-
4-श्वेता राय
1-नानी

छुट्टी आई छुट्टी आई।
बच्चों में है खुशियाँ छाई।
जायेंगें सब नानी के घर।
खेलेंगें हम सब जी भर कर।
प्यारी प्यारी मेरी नानी।
मुझे सुनाती रोज कहानी।
हलवा पूरी मुझे खिलाती।
खेत बाग की सैर करती।
नीति रीत की बात सिखाती।
दुनियादारी भी समझाती।
कहती करना मत नादानी।
जीवन में तुम बनना ज्ञानी।
पढ़ना लिखना आगे बढ़ना।
मुश्किल से तुम कभी न डरना।
आगे बढ़ कर नाम कमाओ
हम सब का जी तुम हरसाओ।
नानी माँ अनमोल है, नानी ममता रूप।
नानी से मिलता हमें, सरिता ज्ञान अनूप।।
-0-

Monday, August 15, 2016

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ !








अम्मा ! ऐसी डोर बनाऊँ  ,

ऊँची उड़े पतंग |

देख-देख कर नीलगगन में ,

दुनिया होगी दंग ! 


                  - ज्योत्स्ना शर्मा 

Thursday, December 3, 2015

133



तीन कविताएँ

डॉरामनिवास मानव



1-हुई सुबह

उठो मियाँ  अब हुई सुबह,
स्वच्छ धुली अनछुई सुबह।

उठकर चन्दातारे अब,
गये घूमने सारे तब।
तुम भी उठो, घूमोफिरो,
क्यों सोये हो प्यारे अब !

ओस, फूल, खुशियाँ  लेकर,
आई है जादुई सुबह।

कौआ कहता रोटी दो,
चाहे छोटीमोटी हो।
चिड़िया गुस्से में बैठी,
कहती मेरा गीत सुनो।

अब इनको क्या कहना है,
पूछती छुईमुई सुबह।

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2-मोनू राजा

मोनू राजा आजा,
बैठ बजाएँ बाजा।
मिलकर सुनें कहानी,
राजा था या रानी।

खेलें चोरसिपाही,
मेटें सभी बुराई।
तितली पकड़ें भागें,
परीलोक में जागें।

पीयें दूधबताशा,
देखें खूब तमाशा।
नहीं किसी को डांटें,
जीभर खुशियाँ  बांटें।
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3- मोनू का उत्पात

पापाजी का पैन चुराकर,
मूँछ बनाई मोनू ने।
दादाजी का बेंत उठाकर,
पूँछ लगाई मोनू ने।

करने लगे उत्पात अनेक,
उछलउछल कर फिर घर में।
किया नाक में दम सभी का,
मोनूजी ने पलभर में।

मम्मी के समझाने से भी,
न मोनू महाशय माने।
डंडाजी जब दिये दिखाई,
तब आ होश ठिकाने।
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