मेरा आँगन

मेरा आँगन

Sunday, September 17, 2017

139

ज्योत्स्ना प्रदीप 
1-राष्ट्रीय  फूल 

फूल कमल का, फूल कमल का 
प्यारा सपना , जैसे जल का !

श्वेत , गुलाबी कहीं नील है 
घर इसके रे ताल, झील है । 

कीचड़ में भी खिल -खिल जाता 
पाठ ये जीवन का  सिखलाता ।

राष्ट्रीय फूल  यही हमारा
मनमोहक ये प्यारा- प्यारा ।

2-हरी भरी सब्ज़ियाँ 


हरी- भरी सब्ज़ियाँ 
 रस-भरी सब्ज़ियाँ ।

आलू ,पालक,शलगम, गाजर
गोभी ,मूली , मटर ,टमाटर ।

धोकर माँ जब इन्हें  पकाती 
भैया को भी खूब सुहाती । 

करे  न कोई आनाकानी 
मज़े -मज़े से खाती  रानी ।

3-राष्ट्रीय वृक्ष


पेड़  घना है ,ठंडी छैया
नीचे बैठो इसके  भैया ।

माँगे तुमसे कब मीठा जल !
हवा बहा  शीतल -शीतल ।

भू  का ये वरदान सुखद है  
पेड़ों में  राजा बरगद है ।

वृक्ष ये बरगद का है प्यारा 
राष्ट्रीय वृक्ष  है यह हमारा ।

 4- लोई 

मेरी  बिल्ली का नाम है  लोई 
आ जाती  है  जब माँ  सोई  

वो उजली, गोरी- गोरी है  
उसकी मज़ेदार  चोरी है  ।

चुप से वो घर में  आती है  
दही,दूध चट कर जाती है । 

 5- चींटी

चींटी देखो कितनी  छोटी 
कभी नहीं होती है  मोटी  ।

सीधे- सीधे जाती है 
सीधे -सीधे आती है ।

जब वो खाना पाती है 
सबको पास बुलाती है ।


चीनी,टॉफी ढोती है 
कभी नहीं ये सोती है ।

रहती है अपने दल में  
घर में चाहे ,जंगल में ।

नहीं लगा मन दंगल में 
श्रम करती है पलपल में ।

मेहनत इसको प्यारी है 
हाथी पर भी भारी है  !

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Monday, April 24, 2017

138

         चिड़िया रानी
                                             प्रियंका गुप्ता

                  चिड़िया रानी, चिड़िया रानी
                  मेरे आँगन में तुम आना
                      रोज सवेरे जब आओगी
                      डालूँगी मैं तुमको दाना
                  अपने छोटी चोंच खोलकर
                  मुझको मीठे गीत सुनाना
                       मैं भी साथ तुम्हारे मिलकर
                       गाऊँगी फिर गीत सुहाना
               मैं जब देखा करती तुमको
               दूर गगन में आते-जाते
                       सोचा करती हूँ मुझको भी
                       काश पंख तुझसे  मिल पाते
                  मैं भी उड़ती साथ तुम्हारे
                 नभ में  पंखों को फैलाकर
                       इधर-उधर मैं घूमा करती
                        खुश हो जाती गाना गाकर

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Tuesday, April 11, 2017

137

ज्योत्स्ना प्रदीप
1
सूरज दादा

सूरज दादा सूरज दादा
रोज़ निभाते अपना  वादा ।

सुबह सवेरे ही तुम आते
 इस जग को तुम रोज़ जगाते।

गरमी में तन को झुलसाते
सरदी  में कितना इतराते ।

तुम ही करते  जग उजियारा 
तुम बिन जग में है  अँधियारा ।
2
मोर  निराला

नीला-नीला मोर  निराला
नाचे देखे मेघा काला।

पंखों को वो जब फैलाए
जो देखे मोहित हो जाए ।

सुन्दर -सुन्दर  प्यारा प्यारा
राष्ट्रीय पक्षी यही हमारा ।
3
 टामी
  टामी  मेरे कुत्ते का नाम
करता घर के बहुत से काम ।
मुँह में वो अखबार दबाता
पापा को झटपट दे आता ।

जब हम उसको ब्रेड खिलाएँ
तभी प्यार से पूँछ हिलाए  ।
 इक खटके से देखो  चौके
शक होने पर कितना भौंके ।
4
 तोता

मीतू ने एक तोता पला
बातूनी पर भोला भाला  ।

करते  हैं उसे सभी  पसंद
कर किया उसे  पिंजरे में बंद ।

नीतू ने जब पिजरा खोला
यहीं रहूँगा’-  तोता  बोला।

मुझको  लगता घर ये प्यारा
मैं सबकी आँखों का तारा ।
5
 नानी   दादी

मेरी प्यारी नानी दादी
मैं तो उनकी  हूँ शहज़ादी ।
आँखें उनकी काली -भूरी
मुझे खिलाती हलवा -पूरी ।

मेरी नानी  जब  घर आती
दोनों मिलकरके बतियाती ।

मैं  करती हूँ उनकी  सेवा
देती मुझको टॉफी , मेवा  ।

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Friday, January 27, 2017

137-सस्वर कविताएँ


डॉ पूर्णिमा राय

1-हुआ सवेरा  
2-जीवन की मुस्कान किताबें
3-पुष्प की अभिलाषा
4-बरसो राम धड़ाके से
5-चाँद का कुर्ता
6.पैसा पास होता तो
6.जीवन की ही जय है
8-फूल और काँटा
9-.एक बूँद
10-.तितली

11.चन्दा मामा दूर के
12. कुछ काम करो

Tuesday, December 6, 2016

136



1-डॉ.गोपाल बाबू शर्मा
1-मुस्काना सीखो

सुन्दर खिले हुए फूलों से,
तुम हँसना-मुस्काना सीखो।
रंग-बिरंगे फूलों जैसा,
जीवन सुघर बनाना सीखो।
सदा दूसरों की राहों में,
खुशी-खुशी बिछ जाना सीखो।
काँटों से घबराना कैसा,
दुख में भी इठलाना सीखो।
अच्छे कामों की खुशबू से,
तुम जग को महकाना सीखो।
यों ही झर जाने में क्या है,
कुछ करके दिखलाना सीखो।
-0-
2-काठ का घोड़ा

यह मत समझो ऐंठा हूँ मैं,
बस घोड़े पर बैठा हूँ मैं।
भले काठ का घोड़ा मेरा
मगर ठाठ का घोड़ा मेरा।
नहीं माँगता दाना-पानी,
फिर भी इस पर रहे जवानी।
एक सीट मैंने हथिया ली,
लेकिन अभी दूसरी ख़ाली।
आना है तो जल्दी आओ,
मेरे पीछे तुम जम जाओ।
है ऐसा अलबेला घोड़ा,
नहीं चाहिए इसको कोड़ा।
जिधर कहोगे उधर मुड़ेगा,
आसमान तक खूब उड़ेगा।
-0-[ जन्म-4 दिसम्बर, 1932, अलीगढ़, विभिन्न विधाओं की तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित,अलीगढ़ के महाविद्यालय से हिन्दी विभाग के रीडर पद से सेवा निवृत्त]
2-सुनीता काम्बोज
1-तितली बड़ी सयानी

तितली बड़ी सयानी है
ये फूलों की रानी है

नहीं पकड़ में आती है
झट से ही उड़ जाती है

फूलों से बतियाती है
क्यों हमसे डर जाती है

पास हमारे भी आओ
सखा हमारी बन जाओ

तुमको नहीं सताएँगे
आओ गीत सुनाएँगे
-0-
2- मूँगफली ओ मूँगफली

 मूँगफली ओ मूँगफली
कहा चली तू कहाँ चली

सर्दी में तू आती है
गर्मी में छुप जाती है

गर्म रेत में सिकती है
धरती में तू उगती है

सबके मन को भाती है
खोल पहन इतराती है
-0-
1-जब आये भोर

खिले कमल जब आये भोर।
उड़कर पंछी करते शोर।

धीरे-धीरे आती धूप।
झाँक झील में देखे रूप।

उड़-उड़ कौआ ढूँढ़ें छाँव
बैठ नीम पर करता काँव।

चिड़िया ढूँढे रोशनदान
तिनके रखकर गाती गान।

बादल देख नाचते मोर।
गरज-गरज बरखा घनघोर।

देख -देख बच्चों का चाव
तैर रही कागज़ की नाव।

जगमग जुगनू बना कतार
चमके ज्यों हीरों का हार।

नानी करे परी की बात।
आती जब तारों की रात।
-0-
2- ओढ़ लबादा

ओढ़ लबादा बादल वाला
क्यों बैठे हो सूरज भैया
हाड़ कँपाती सर्दी से क्या
तुम ऐंठे हो सूरज भैया।

जल्दी जल्दी घर जाते हो
मम्मी ने क्या डाँट पिलाई
या फिर अच्छा लगता तुमको
सोते रहना ओढ़ रजाई।

भूले रहना रबड़ी कुल्फी
दूध जलेबी खूब मिलेगी।
मीठी-मीठी गुड़ की भेली
चखना तुमको खूब जमेगी।

खिली-खिली सुंदर बगिया में
आओ जरा देर हम खेलें।
धूप गुनगुनी लगे सुहानी
जरा मजे इसके भी ले लें
-0-
4-श्वेता राय
1-नानी

छुट्टी आई छुट्टी आई।
बच्चों में है खुशियाँ छाई।
जायेंगें सब नानी के घर।
खेलेंगें हम सब जी भर कर।
प्यारी प्यारी मेरी नानी।
मुझे सुनाती रोज कहानी।
हलवा पूरी मुझे खिलाती।
खेत बाग की सैर करती।
नीति रीत की बात सिखाती।
दुनियादारी भी समझाती।
कहती करना मत नादानी।
जीवन में तुम बनना ज्ञानी।
पढ़ना लिखना आगे बढ़ना।
मुश्किल से तुम कभी न डरना।
आगे बढ़ कर नाम कमाओ
हम सब का जी तुम हरसाओ।
नानी माँ अनमोल है, नानी ममता रूप।
नानी से मिलता हमें, सरिता ज्ञान अनूप।।
-0-