मेरा आँगन

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Wednesday, September 15, 2010

सामूहिक -रचना -कौशल

 प्रीति,तुषार और आकांक्षा

वर्षा का मनभावन मौसम  
वर्षा का मनभावन मौसम
हर्षित हो जाता है तन-मन ।
वर्षा से हरियाली होती
वर्षा ही खुशहाली बोती ।
जब काले बादल घिर आते
तब वे सबके मन को भाते ।

पकौड़ी माँ ने तभी बनाई
सबने मिलकर जमकर खाई ।
वर्षा है अमृत की धारा
जिसको पीता चातक प्यारा
ये है सबसे प्यारा मौसम
ये है सबसे न्यारा मौसम
मोर नाचकर मन बहलाते
बच्चे कूदें शोर मचाते ।

चुन्नू-मुन्नू भोलू मिलकर
पानी में सब नाव चलाते।
सबके मन में छाई उमंग ,
नभ में लाखों उड़ी पतंग।
झूम-झूमकर नाचे मोर ,
मेंढक टर्र-टर्र करते शोर ।

काले-काले बादल छाते
हवा सुहानी लेकर आते ।
सबके मन को बादल भाते
संग बादल के हम भी गाते ।
डाल-डाल पर बोले कोयल ।
मिसरी कानों में घोले कोयल
-0-
[ राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय, सैक्टर -11 , नई दिल्ली-110085 ]

4 comments:

VIJAY KUMAR VERMA said...

झूम-झूमकर नाचे मोर ,
मेंढक टर्र-टर्र करते शोर ।

काले-काले बादल छाते
हवा सुहानी लेकर आते ।
बहुत ही सुन्दर बाल-कविता .पढ़ कर बचपन के बरसात के समय की याद आ गयी ....बधाई ...

रावेंद्रकुमार रवि said...

बहुत सराहनीय प्रयास!

P.N. Subramanian said...

बधाई के पात्र हैं.

Dr.Bhawna said...

Bahut sundar chitaran..bahut-2 badhai