मेरा आँगन

मेरा आँगन

Monday, May 10, 2010

हरियाली ने बौर सजाया

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
जन्म दिन वह याद है आया
पेड़ भेंट में मैंने पाया ।
आँगन में वह पेड़ लगाया
पानी उसको रोज पिलाया ।
पानी पीकर निकली डाली
डाली पर छाई हरियाली ।
हरियाली ने बौर सजाया
खुशबू से आँगन महकाया
आँगन में गाती मतवाली
कुहू -कुहू कर कोयल काली ।
महका बौर आम भी आए
हम सबने मिल-जुलकर खाए ।
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4 comments:

रावेंद्रकुमार रवि said...

बहुत बढ़िया कविता है!
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शीर्षक बिल्कुल नए रूप में निखरकर सामने आया है!
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सबसे प्यारा लगता है : अपनी माँ का मुखड़ा!

माधव said...

very good poem. i landed here first time. blog is fantastic


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Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन कविता!

सुधाकल्प said...

आम के मौसम में आम की याद दिलाती हुई सुन्दर बालकविता |