मेरा आँगन

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Saturday, February 9, 2008

चूहे का सूट

–नवीन चतुर्वेदी

सर्दी पडी बहुत, चूहे ने
अपना सूट सिलाया।
दो कतरन ऊनी कपडे की
चार रेशमी लाया।
दर्जी बोला–‘‘समय नहीं है,
कहीं और तुम जाओ,
और किसी छोटे दर्जी से
अपना सूट सिलाओ।‘‘
अपने पैने दांत दिखा
जब चूहे ने धमकाया
नाप लिया फौरन चूहे का
मन ही मन घबराया।

1 comment:

रवीन्द्र रंजन said...

अच्छी लगी कविता।