मेरा आँगन

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Monday, August 15, 2016

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ !








अम्मा ! ऐसी डोर बनाऊँ  ,

ऊँची उड़े पतंग |

देख-देख कर नीलगगन में ,

दुनिया होगी दंग ! 


                  - ज्योत्स्ना शर्मा 

Thursday, November 10, 2011

आगत का स्वागत


welcome to the world
1-भावना कुँअर-
नन्हीं सोनपरी ने
जब धरती पर आकर
आँखे खोली
सभी परिवार जनों के चेहरों पर
खुशियों की लहर दौड़ी
दद्दू ने तो नन्हीं परी के लिए
फटाफट प्यारी सी रचना भी रच डाली,
जिसमें उमड़ा है दद्दू का अथाह स्नेह,
दादी की ममता,माँ का वात्स्ल्य
और पिता का दुलार।
नन्हीं सी परी के लिए
हमारी ओर से
ढेरों ढेरों रों रों रों शुभकामनाओं के साथ
इस धरती पर स्वागत है
काम्बोज जी के समस्त परिवार को भावना की ओर से हार्दिक अनगिनत बधा
याँ!!.
-0-
2-सोनपरी
-कमला निखुर्पा

हाथों में लिये
जादू की नन्ही छड़ी
सितारों जड़ी
लो आई सोन परी
.छूना ना कोई
उजरी निखरी है।
हो ना वो मैली.
है निर्मल कोमल
ये सोनपरी
सपने अपने- से
.मुट्ठी में भरे ,
अधखुली अँखियाँ,
मुसकाई है
जाने क्यों निंदिया में
दुलारी ये सोनपरी.
-0-
3-डॉ हरदीप कौर सन्धु
सोनपरी के जन्म पर ढेरों शुभकामनाएँ !
दादा -दादी की दुलारी
माता -पिता की प्यारी
नन्ही सोनपरी को बहुत सा प्यार!
कितना सुन्दर तोहफा मिला है हमारी सोनपरी को
दादा के दिल में पगता मोह शब्द बनकार इस रचना में उतरा है !
इसी भाव -परम्परा में मेरे हाइकु-
1
दादा-दादी की
है अब ये दुनिया
प्यारी गुड़िया
2
जन्मी बिटिया
खुशबू ही खुशबू
आँगन खिला
 3
कौन है आया
है किसका उजाला
जन्मी बिटिया
 4
गोद में नन्हीं
माँ के आँचल में ज्यों
खिली चाँदनी
 5
नन्ही -सी परी
है पिता की दुलारी
जग से प्यारी
 6
नन्ही को पिता
जब गोद उठाए
दुनिया भूले
 7
बिटिया जन्मी
हृदय -धड़कन
ज्यों माँ की बनी
 -डॉ हरदीप सन्धु
-0-
4-रचना श्रीवास्तव
  दादा जी बन
हिमांशु जी प्रसन्न
दादी भी खुश
पाई जो  नन्ही परी
छोटे से हाथ
गुलाबी पंखुड़ियाँ
मन को मोहे
अधरों में कियाँ की
मीठी आवाज
माँ की नर्म गोद में
परी मुस्काई
नई दुनिया भाई  
माँ -पिता संग
बाबा दादी को देख
मन हर्षाया
प्रभु को यहीं पाया
धन्य हुई मै
आपकी गोद पा के
स्नेह- जल से
खुद को भिगोकर
गुलाबी  रंग
कमरे को सजाना
गुलाबी ड्रेस
मुझको पहनाना
थोड़ी  बड़ी हो
सबको  दौड़ाऊँगी
दादा को घोडा,
पापा को बना हाथी
करूँ सवारी।
सपनो से भरी है-
बंद  है मुट्ठी 
मेरे, कुछ आपके
भर दूँगी मै
घर में घडकन
नन्हे पैरों से!
जन्म देने के लिए
शत शत नमन !!  

-0-
5-ॠता शेखर ‘मधु’
कितनी प्यारी
आई राजदुलारी
दादी चहके
दादा बोले ह़ँसके
ये मेरी 'सोनपरी'।

नव जीवन
का,करके सृजन
माँ है हर्षित
पाए नन्हीं गुड़िया
पिता का आलिंगन।

जग ने जाना
सोनपरी का आना
झूमी धरती
खिला है उपवन
बसी सबके मन।

   -0-
6-प्रियंका गुप्ता
बाँहों में आके
नन्हीं परी मुस्काई
खुशियाँ लाई
-0-
7-सीजा
दादा दादी की पोती आई
मम्मी पापा की बिटिया आई
दो भा
यों की बहन है आई
घर की सारी खुशियाँ लाई
आते ही घर में धूम मचाई

मम्मी जी पापा जी, मेरी और से गुडिया को बहुत बहुत प्यार देना
मिहिर मयंक की और से भी प्यार देना
अंजना को मम्मी बनने पर बधाई
-आपकी बेटी सीजा
 -0-
8-देवी नागरानी
रामेश्वर भाई आपको बधाई!

खुशियाँ लाई
लक्ष्मी घर में आई
तुम्हें बधाई
*
लाड़ो का आना
दादा औ दादीजी ने
पावन माना
*
आप भी खाओ
मोतीचूर के लड्डू
हमें खिलाओ
बहुत शुभकामनाओं के साथ
-0-
9-मंजु मिश्रा , कैलिफ़ोर्निया
बेटियां तो भोर का सूरज होती हैं, उनके आने से जीवन में ख़ुशी की धूप भर जाती है.  बिटिया को जीवन में सदैव सर्वश्रेष्ठ ही मिले ऐसी कामना है!
 तुम !
भोर का सूरज,
तुम आयीं तो 
तुम्हारे साथ 
ज़िंदगी की 
सुबह आई 
 तुम
एक नन्हा सा फ़रिश्ता 
तम्हे गोद में ले कर,
माँ-पापा , दादा-दादी
सब के अरमान 
हुए पूरे !

तुम
वक़्त के हाथों मिला हुआ 
एक ख़ूबसूरत तोहफा,
तुम्हारे आने से 
ज़िंदगी सज गयी 

हार्दिक स्नेह सहित 
मंजु मिश्रा , कैलिफ़ोर्निया
-0-
10-रवि रंजन
दादा की गोद
पौत्री की किलकारी
स्वर्णिम पल
हाइकु चोका ताँका
आशीर्वादों का ताँता|
बधाई और शुभकामनाएँ|

-0-
11-डॉ सुधा गुप्ता
1
दिल्ली है सूनी
भैया हिमांशु बिना
धीरज धरा
शुभागता-स्वागत
हर्ष-कमल खिला ।
2
सुख छलका
मन में न समाया
इतना पाया
मिली ख़ुशख़बरी
आई है सोनपरी ।
3
जगी है आशा
पूरे परिवार में
खिली जो कली
सुख की वर्षा हुई
वर्षों की साध फली ।
4
आँखों की ज्योति
मन -सीपी का मोती
हीरक-कनी
शब्द अधूरे पड़े
शोभा है ऐसी घनी ।
-0-

12-मुमताज टी एच खान
1
नन्हीं गुड़िया
चिड़िया -सी चहके
खिले फूल -सी
खुशबू-सी महके
आपके आँगन में ।
2
संग लाई है
वो क़िस्मत भी ऐसी
परियों -जैसी
ज़न्नत से वो माँग
देखे सारा जहान
-0-
14/11/2011