मेरा आँगन

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Monday, November 27, 2017

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बाल कविताएँ : डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
1
हवा चली है सर-सर-सर
बादल आए मटकी भर

पानी बरसा झर-झर-झर
भीग गए चिड़िया के पर 

काँप रही है थर-थर-थर
उसका भी बनवा दो घर

रहे चैन से जी भरकर
देखे आँखें मटका कर । 
2
साइकिल के हैं  पहिए दो
तीन सहेलियाँ अब क्या हो

मोनू जी ले आए कार 
हैं गाड़ी में पहिए चार ।

बिट्टू का है सुन्दर नाच 
देख रहे हैं बच्चे पाँच ।

झूठी बातें कभी मत कह
तभी मिलेंगे लड्डू छह ।

नानी कहें कहानी सात 
सुनते बीती पूरी रात ।

बाक़ी रह गया पढ़ना पाठ
उट्ठक-बैठक होंगी आठ।

सारे दिन बस करते शोर
नौ बच्चे पढ़ने के चोर ।

आ गई विद्यालय की बस 
उसमें भी हैं खिड़की दस ।
 3
 गाँव गए थे चुन्नू जी 
मिले वहाँ पर मुन्नू जी 
दोनों ने मिल किया कमाल 
गली, खेत में खूब धमाल 
बाग़ों में घूमे दिनभर
बातें करते चटर-पटर
तोड़ रहे थे कच्चे आम
चुन्नू जी गिर पड़े धड़ाम 
कान पकड़कर बोले राम !
कभी करूँ न ऐसा काम ।।
 4
मूँछें 
चाचा जी की प्यारी मूँछें 
लगती कितनी न्यारी मूँछें 
खूब मरोड़ें दिन भर इनको
ओ हो हो बेचारी मूँछें 
ज़रा न झुकतीं सतर नुकीली
भैया बड़ी करारी मूँछें
मैं भी ऐसी मूँछ लगाऊँ 
चाचा जी जैसे बन जाऊँ । 

-0-

Monday, August 15, 2016

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ !








अम्मा ! ऐसी डोर बनाऊँ  ,

ऊँची उड़े पतंग |

देख-देख कर नीलगगन में ,

दुनिया होगी दंग ! 


                  - ज्योत्स्ना शर्मा 

Wednesday, March 4, 2015

आई होली !




आई होली रंग कमाल ,
निकली टोली लिए गुलाल |
पाँव छुए फिर सभी बड़ों के ;
किया साथियों संग धमाल ||


मुँह रँगा है पीला-काला ,
ले पिचकारी रंग जब डाला |
झूठ-मूठ अम्मा गुस्साईं ;
खिल-खिल करती भागी बाला ||

होली की खूब-खूब शुभ कामनाओं के साथ

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
04-03-15 
चित्र गूगल से साभार 

Friday, June 7, 2013

हार्दिक शुभ कामनाएँ-5 जून-6 जून

शान्तनु काम्बोज
शान्तनु काम्बोज और तरुणा काम्बोज
"उपवन के प्यारे पुष्पों को
           खिलती खूब बहार मिले ,
सुन्दर सरस मधुर हो जीवन
           स्नेहपूर्ण व्यवहार मिले |
नयी मंजिलें ,शिखर नए हों
           नित नित हो आगे बढ़ना
पग पग पर पथ सरल हो इतना
           कठिनाई को हार मिले.......
प्रिय शान्तनु(नन्हा हाइकु)और
सुशान्त काम्बोज,( बैठे मयंक , मिहिर)
उसके माता-पिता जी ..
व परिवारी जन को 
जन्म दिवस पर 
हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ ...:))

डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

Wednesday, November 14, 2012

माँ कहती है-



डॉ• ज्योत्स्ना शर्मा

सब मुझको "मीठी" कहते हैं 
,
माँ कहती है कम बतियाओ ।

मेरी फ्राक बड़ी है सुन्दर
 
माँ कहती है मत इतराओ ।






पापा कहते परी हूँ उनकी ,

माँ कहती है मुँह धो आओ । 


बच्चे कहते आओ खेलें ,

माँ कहती है -पढने जाओ ।


प्यारी सखी  से हुई लड़ाई

माँ कहती है- भूल भी जाओ । 


मेरी गुड़िया सोई न अब तक ,

माँ कहती है- अब सो जाओ । 


आँख में आँसू देखे- बोले 
,
गले लगा लूँ पास तो आओ ।
-0-


Sunday, September 23, 2012

भैया बहुत सताए मुझको


डॉ ज्योत्स्ना शर्मा


भैया बहुत सताए मुझको
चोटी खींच रुलाए मुझको ।
गुड़िया मेरी छीने भागे
पीछे खूब भगाए मुझको ।

मेरी पुस्तक ,रंग उसके हैं
खेलें कैसे, ढंग उसके हैं
क्या खाना है, क्या पहनाऊँ
नए- नए हुड़दंग उसके हैं ।

फिर भी तुमको क्या बतलाऊँ
प्यार उसी पर आए मुझको  ।
मेरा प्यारा न्यारा भैया  ,
कभी दूर ना भाए मुझको ।
-0-