Monday, June 18, 2012
Wednesday, April 11, 2012
अन्तर समझिएगा
किसी भी शब्द में दो स्वर एक साथ नहीं जुड़ते । हिन्दी के प्रकाशक भी इन गलतियों के लिए जिम्मेदार हैं ।
वर्ण विन्यास समझ लें तो दिक्कत नहीं होगी ।
1-प्+र्+अ=प्र
2-द्+ध्+अ= द्ध
3-श् + र्+अ= श्र
4-श्+ॠ = शृ
5-श् +र्+अ+ॠ = श्रृ= हिन्दी में इसका अस्तित्व केवल गलत प्रयोगों में है ।कारण,दो स्वर एक साथ नहीं आ सकते।
6-ध्द=X कुछ लोग युध्द इस तरह लिखते हैं , जो गलत है ।
सही रूप है -युद्ध
8-कोई महाप्राण इस रूप में अल्पप्राण से पहले नहीं आता ।
र् का प्रयोग -क+र्+म= कर्म अगले वर्ण पर होता है । कुछ लोग आशीर्वाद को भूलवश आर्शीवाद लिखते हैं ।
श के पहले भाग को अलग घुण्डी की तरह भी बनाया जाता है जो पुराने समय से आज तक शब्दकोशों में शामिल है ।
इसे शब्द चित्र में समझाया गया है ।
Tuesday, April 3, 2012
BABY RAIN
BABY RAIN
I saw
A rainbow
This morning
Hiding behind
A leafless tree.
Calling me
To climb upon...
Fly in to the sky,
to play
with the the birds
to dance
in the baby rain
just coming out
from the Mama cloud.
by :Ela Kkulkarni
GRADE-3
Mrs. Carstensan
Fairlands Elementary
इला कुलकर्णी, उम्र - ८ वर्ष, कक्षा - ३ की छात्रा, निवास प्लेसंटन - कैलिफोर्निया
अन्य अभिरुचियाँ... चित्रकारी, तैराकी एवं विभिन्न विषयों पर पुस्तकों Saturday, March 17, 2012
Saturday, March 3, 2012
Friday, March 2, 2012
भर ओक बाँटे वह खुशियाँ
डॉ हरदीप कौर सन्धु
कितनी भोली और मासूम सी
फूलों जैसे खिला है चेहरा
खिल-खिल वह हँसती है
कद से वह लम्बी दिखती
अभी भोली बातें करती है
भर ओक बाँटे वह खुशियाँ
दुःख कभी न आएँ अंगना
हर पल एक नई सौगात बन जाए
जिन्दगी सतरंगी कायनात बन जाए
रहे भरता सदा रब
उसकी तमन्नाओं की पिटारी को
चल काला टीका लगा दूँ
कहीं नजर न लग जाए
मेरी परियों जैसी धी -रानी को
-0-
Wednesday, February 15, 2012
मेरी मुनिया
खिलखिलाई
पहाड़ी नदी-जैसी
मेरी मुनिया ।
इन हाइकु को देने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ-
सुदर्शन रत्नाकर
1
तुम्हारी हँसी
सितार बजा गई
सूने घर में ।
2
धूप -सी हँसी
आँगन में उतरी
सहला गई ।
सितार बजा गई
सूने घर में ।
2
धूप -सी हँसी
आँगन में उतरी
सहला गई ।
Friday, January 27, 2012
Thursday, December 15, 2011
Thursday, November 10, 2011
आगत का स्वागत
welcome to the world !
1-भावना कुँअर-
नन्हीं सोनपरी ने
जब धरती पर आकर
आँखे खोली
सभी परिवार जनों के चेहरों पर
खुशियों की लहर दौड़ी
दद्दू ने तो नन्हीं परी के लिए
फटाफट प्यारी सी रचना भी रच डाली,
जिसमें उमड़ा है दद्दू का अथाह स्नेह,
दादी की ममता,माँ का वात्स्ल्य
और पिता का दुलार।
नन्हीं सी परी के लिए
नन्हीं सी परी के लिए
हमारी ओर से
ढेरों ढेरों रों रों रों शुभकामनाओं के साथ
इस धरती पर स्वागत है
काम्बोज जी के समस्त परिवार को भावना की ओर से हार्दिक अनगिनत बधाइयाँ!!.
काम्बोज जी के समस्त परिवार को भावना की ओर से हार्दिक अनगिनत बधाइयाँ!!.
-0-
2-सोनपरी
-कमला निखुर्पा
हाथों में लिये
जादू की नन्ही छड़ी
सितारों जड़ी
लो आई सोन परी
.छूना ना कोई
उजरी निखरी है।
हो ना वो मैली.
है निर्मल कोमल
ये सोनपरी
सपने अपने- से
.मुट्ठी में भरे ,
अधखुली अँखियाँ,
मुसकाई है
जाने क्यों निंदिया में
दुलारी ये सोनपरी.
-0-
सोनपरी के जन्म पर ढेरों शुभकामनाएँ !
दादा -दादी की दुलारी
माता -पिता की प्यारी
दादा -दादी की दुलारी
माता -पिता की प्यारी
नन्ही सोनपरी को बहुत सा प्यार!
कितना सुन्दर तोहफा मिला है हमारी सोनपरी को
कितना सुन्दर तोहफा मिला है हमारी सोनपरी को
दादा के दिल में पगता मोह शब्द बनकार इस रचना में उतरा है !
इसी भाव -परम्परा में मेरे हाइकु-
1
दादा-दादी की
है अब ये दुनिया
प्यारी गुड़िया
2
जन्मी बिटिया
खुशबू ही खुशबू
आँगन खिला
3
कौन है आया
है किसका उजाला
जन्मी बिटिया
4
गोद में नन्हीं
माँ के आँचल में ज्यों
खिली चाँदनी
5
नन्ही -सी परी
है पिता की दुलारी
जग से प्यारी
6
नन्ही को पिता
जब गोद उठाए
दुनिया भूले
7
बिटिया जन्मी
हृदय -धड़कन
ज्यों माँ की बनी
-डॉ हरदीप सन्धु
-0-
4-रचना श्रीवास्तव
दादा जी बन
हिमांशु जी प्रसन्न
दादी भी खुश
पाई जो नन्ही परी
छोटे से हाथ
गुलाबी पंखुड़ियाँ
मन को मोहे
अधरों में कियाँ की
मीठी आवाज
माँ की नर्म गोद में
परी मुस्काई
नई दुनिया भाई
माँ -पिता संग
बाबा दादी को देख
मन हर्षाया
प्रभु को यहीं पाया
धन्य हुई मै
आपकी गोद पा के
स्नेह- जल से
खुद को भिगोकर
हिमांशु जी प्रसन्न
दादी भी खुश
पाई जो नन्ही परी
छोटे से हाथ
गुलाबी पंखुड़ियाँ
मन को मोहे
अधरों में कियाँ की
मीठी आवाज
माँ की नर्म गोद में
परी मुस्काई
नई दुनिया भाई
माँ -पिता संग
बाबा दादी को देख
मन हर्षाया
प्रभु को यहीं पाया
धन्य हुई मै
आपकी गोद पा के
स्नेह- जल से
खुद को भिगोकर
गुलाबी रंग कमरे को सजाना
गुलाबी ड्रेस
मुझको पहनाना
थोड़ी बड़ी हो
सबको दौड़ाऊँगी
दादा को घोडा,
पापा को बना हाथी
करूँ सवारी।
सपनो से भरी है-
बंद है मुट्ठी
मेरे, कुछ आपके।
भर दूँगी मै
घर में घडकन
नन्हे पैरों से!
जन्म देने के लिए
शत शत नमन !!
-0-
5-ॠता शेखर ‘मधु’
कितनी प्यारी
आई राजदुलारी
दादी चहके
दादा बोले ह़ँसके
ये मेरी 'सोनपरी'।
नव जीवन
का,करके सृजन
माँ है हर्षित
पाए नन्हीं गुड़िया
पिता का आलिंगन।
जग ने जाना
सोनपरी का आना
झूमी धरती
खिला है उपवन
बसी सबके मन।
तुम !
आई राजदुलारी
दादी चहके
दादा बोले ह़ँसके
ये मेरी 'सोनपरी'।
नव जीवन
का,करके सृजन
माँ है हर्षित
पाए नन्हीं गुड़िया
पिता का आलिंगन।
जग ने जाना
सोनपरी का आना
झूमी धरती
खिला है उपवन
बसी सबके मन।
-0-
6-प्रियंका गुप्ता
बाँहों में आके
नन्हीं परी मुस्काई
खुशियाँ लाई ।
नन्हीं परी मुस्काई
खुशियाँ लाई ।
-0-
7-सीजा
दादा दादी की पोती आई
मम्मी पापा की बिटिया आई
दो भाइयों की बहन है आई
घर की सारी खुशियाँ लाई
आते ही घर में धूम मचाई
मम्मी जी पापा जी, मेरी और से गुडिया को बहुत बहुत प्यार देना
मिहिर मयंक की और से भी प्यार देना
अंजना को मम्मी बनने पर बधाई-आपकी बेटी सीजा
मम्मी पापा की बिटिया आई
दो भाइयों की बहन है आई
घर की सारी खुशियाँ लाई
आते ही घर में धूम मचाई
मम्मी जी पापा जी, मेरी और से गुडिया को बहुत बहुत प्यार देना
मिहिर मयंक की और से भी प्यार देना
अंजना को मम्मी बनने पर बधाई-आपकी बेटी सीजा
-0-
8-देवी नागरानी
रामेश्वर भाई आपको बधाई!
खुशियाँ लाई
लक्ष्मी घर में आई
तुम्हें बधाई
*
लाड़ो का आना
दादा औ दादीजी ने
पावन माना
*
आप भी खाओ
मोतीचूर के लड्डू
हमें खिलाओ
बहुत शुभकामनाओं के साथ
-0-
लक्ष्मी घर में आई
तुम्हें बधाई
*
लाड़ो का आना
दादा औ दादीजी ने
पावन माना
*
आप भी खाओ
मोतीचूर के लड्डू
हमें खिलाओ
बहुत शुभकामनाओं के साथ
-0-
9-मंजु मिश्रा , कैलिफ़ोर्निया
बेटियां तो भोर का सूरज होती हैं, उनके आने से जीवन में ख़ुशी की धूप भर जाती है. बिटिया को जीवन में सदैव सर्वश्रेष्ठ ही मिले ऐसी कामना है!
सुबह आई
तुम
एक नन्हा सा फ़रिश्ता
तुम
एक नन्हा सा फ़रिश्ता
तम्हे गोद में ले कर,
माँ-पापा , दादा-दादी
सब के अरमान
हुए पूरे !
तुम
वक़्त के हाथों मिला हुआ
माँ-पापा , दादा-दादी
सब के अरमान
हुए पूरे !
तुम
वक़्त के हाथों मिला हुआ
एक ख़ूबसूरत तोहफा,
तुम्हारे आने से
तुम्हारे आने से
ज़िंदगी सज गयी
हार्दिक स्नेह सहित
मंजु मिश्रा , कैलिफ़ोर्निया
-0-
10-रवि रंजन
दादा की गोद
पौत्री की किलकारी
स्वर्णिम पल
हाइकु चोका ताँका
आशीर्वादों का ताँता|
बधाई और शुभकामनाएँ|
-0-
11-डॉ सुधा गुप्ता
1
दिल्ली है सूनी
भैया ‘हिमांशु’ बिना
धीरज धरा
शुभागता-स्वागत
हर्ष-कमल खिला ।
2
सुख छलका
मन में न समाया
इतना पाया
आई है सोनपरी ।
3
जगी है आशा
पूरे परिवार में
खिली जो कली
सुख की वर्षा हुई
वर्षों की साध फली ।
4
आँखों की ज्योति
मन -सीपी का मोती
हीरक-कनी
शब्द अधूरे पड़े
शोभा है ऐसी घनी ।
-0-
1
नन्हीं गुड़िया
चिड़िया -सी चहके
खिले फूल -सी
खुशबू-सी महके
आपके आँगन में ।
2
संग लाई है
वो क़िस्मत भी ऐसी
परियों -जैसी
ज़न्नत से वो माँग
देखे सारा जहान
-0-
14/11/2011
Saturday, November 5, 2011
दुनियादारी सीखी गुलाब ने
सुबह की पहली किरण के साथ गुलाब की नन्ही-सी कली ने अपनी आँखें खोल कर धीरे से बाहर झाँका। ओस की बूंद उसकी आँखों में गि र पड़ी तो कली ने गबरा कर अपनी पंखुड़ियाँ फैला दी। अपनी लाल-लाल कोमल पंखुड़ियों पर वह खुद ही मुग्ध हो गई। थोड़ी देर इधर-उधर का नज़ारा देखने के बाद उसे कहीं से बातें करने की आवाज़ सुनाई दी। घूम कर देखा तो जूही और बेला के फूल आपस में बतिया रहे थे। गुलाब ने भी उनसे बातें करनी चाही,"बड़े भाइयों,"मैं भी आपसे बात करना चाहता हूँ...।"
"तुम बेटे...अभी बच्चे हो," जूही -बेला के फूलों ने विनोद से झूमते हुए कहा,"थोड़ी दुनियादारी सीख लो तब शामिल होना हमारी मंडली में...।"
वे फिर आपस में बातें करने लगे तो गुलाब ने सिर को झटका दिया,"हुँ...बच्चा हूँ...। कैसी बोरियत भरी दुनिया है...। क्या मेरा कोई दोस्त नहीं है...?" दुःखी होकर उसने सिर झुका लिया।
"दुःखी क्यों होते हो दोस्त," कहीं से बड़ी प्यार-भरी आवाज़ आई,"हम तुम्हारे दोस्त हैं न...। तुम्हारे लिए हम पलकें बिछाए हुए हैं। आओ, हमारे दोस्त बन जाओ...।"
गुलाब ने सिर उठा कर चारो तरफ़ देखा। कौन बोला ये? फिर अचानक काँटों को अपनी ओर मुख़ातिब पा उसने मुँह बिचका दिया,"दोस्ती और तुमसे...? शक्ल देखी है अपनी...? क्या मुकाबला है मेरा और तुम्हारा? न मेरे जैसा रूप, न कोमलता...और उस पर से मेरे लिए पलकें बिछाए बैठे हो...। न बाबा न, तुम्हारी पलकें तो मेरे नाजुक शरीर को चीर ही डालेंगी।"
गुलाब की कड़वी बातों ने काँटों का दिल ही तोड़ दिया। पर उसे बच्चा समझ उन्होंने उसे माफ़ कर दिया और मुस्कराते रहे पर बोले कुछ नहीं।
"पापा,देखो! कितना प्यारा गुलाब है...।" तीन वर्षीय बच्चे को अपनी तारीफ़ करते सुन कर गुलाब गर्व से और तन गया।
‘ऐसे ही प्यारे लोग मेरी दोस्ती के क़ाबिल हैं,’ गुलाब ने सोचा और काँटों की ओर देख कर व्यंग्य से मुस्करा दिया।
"पापा, मैं तोड़ लूँ इसे? अपनी कॉपी में इसकी पंखुड़ियाँ रखूँगा।" बच्चे की बात सुन गुलाब सहम गया,"ओह! कोई तो मुझे तोड़े जाने से बचा लो...। आज ही तो मैने अपनी आँखें खोली हैं। अभी मैने देखा ही क्या है?" गुलाब ने आर्त स्वर में दुहाई दी,"मैं क्या बेमौत कष्टकारी मौत मारा जाऊँगा?"
"नहीं दोस्त! काँटों की गंभीर आवाज़ सुनाई दी,"तुम चाहे हमें दोस्त समझो या न समझो, पर हम तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होने देंगे...।"
इससे पहले कि बच्चे का हाथ गुलाब तोड़ पाता, काँटों ने अपनी बाँहें फैला दी। बच्चा चीख मारता हुआ, सहम कर वापस चला गया। गुलाब ने चैन की साँस ली।
थोड़ी देर बाद बगीचे के फूलों के हँसी-ठहाकों में गुलाब और काँटों की सम्मिलित हँसी सबसे तेज़ थी।
गुलाब अब दुनियादारी सीख चुका था...।
-0-
Thursday, November 3, 2011
मेरे खोए हुए हीरे
किसी के हीरे खो जाएँ तो कितना दु:ख होगा! और अगर मिल जाएँ तो कितनी खुशी होगी! धरती जितने बड़े आँचल में भी नहीं समाएगी! आँसू भी उमड आएँगे । मेरे दो जुड़वा छात्र आयुश्री और अनिरुद्ध, जिनका कभी 1994 में कक्षा एक में प्रवेश हुआ था , छह साल मेरे सम्पर्क में रहे । उसके बाद बिछुड़ गए आज चीन में पढ़ाई कर रहे हैं । इनका पत्र दे रहा हूं -namashkar sir...aapko itne dino baad pakar badi hi khushi huyi......mujhe bilkul vishawas hi nahi ho pa raha hai ki aapko aakhirkar itni mahnat k baad maine dhoond hi liya..wo bhi ek sociel networking site par.....aapko main yaad hu ye sochkar man ko badi hi shanti mili....kyuki meri jaisi chhatra aapko anginat baar mili hongi par aapke jaisa sikshak mujhe jeevan me kahi nahi mila.....mere bachpan ko sunhara banane me aap logo ki bahut yaadein judi huyi hai...
k.v.chirimiri k purane teachers jab bhi yaad aate hai to jaise aankho me paani bhar aata hai....kuch dino pahle Moghe madam ko pakar bhi meri yahi dasha huyi thi
main aapko yakeen nahi dila sakti ki main aaj kitni khush hu.... i am very very happy sir
maine aapki kavitao ki kitabo ko aaj bhi sanjokar rakha hai....
main abhi china me hu...apni medical ki parayi poori kar rahi hu..
aakhiri saal chal raha hai....aniruddh bhi mere sath yahi hai....
hum sath me parh rahe hai.....papaji hume 2 saal pahle hi chhorkar ishwar k paas chale gaye hai....par unke sankalp, mummy ki kathor mehnat aur aap sabhi k aashirwad ki wajah se humlog itne aage tak pahuch sake hai....yakeen mainiye aapke jane k baad humlogo ne aapka contact no. dhoondne ki bahut koshish ki par aap nahi mile....par aaj bhagwanji ki daya se aap mil hi gaye....apna contact no. plz send kar dijiyega...mujhe bahut khushi hogi....
main aapko yakeen nahi dila sakti ki main aaj kitni khush hu.... i am very very happy sir
maine aapki kavitao ki kitabo ko aaj bhi sanjokar rakha hai....
main abhi china me hu...apni medical ki parayi poori kar rahi hu..
aakhiri saal chal raha hai....aniruddh bhi mere sath yahi hai....
hum sath me parh rahe hai.....papaji hume 2 saal pahle hi chhorkar ishwar k paas chale gaye hai....par unke sankalp, mummy ki kathor mehnat aur aap sabhi k aashirwad ki wajah se humlog itne aage tak pahuch sake hai....yakeen mainiye aapke jane k baad humlogo ne aapka contact no. dhoondne ki bahut koshish ki par aap nahi mile....par aaj bhagwanji ki daya se aap mil hi gaye....apna contact no. plz send kar dijiyega...mujhe bahut khushi hogi....
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