पतंग
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मंजूषा ‘मन’
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Tuesday, October 20, 2015
दादी
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मंजूषा ‘ मन ’ छोड़ अपना गाँव पीपल की छाँव। दादी ने रखा था शहर में पाँव। भाई नहीं उनको यहाँ की हवा चल ही न पाई ये जीवन की ...
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