पतंग
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Tuesday, October 20, 2015
दादी
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मंजूषा ‘ मन ’ छोड़ अपना गाँव पीपल की छाँव। दादी ने रखा था शहर में पाँव। भाई नहीं उनको यहाँ की हवा चल ही न पाई ये जीवन की ...
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Saturday, July 13, 2013
सुनहरी सुबह
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पंछियों ने चहककर कहा- उठो, जागो, प्यारे बच्चो कि तुम्हे स्कूल बुला रहा है | चुपके से ठंडी हवा ने कपोलों को छूकर कहा- खिड़क...
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Friday, May 15, 2009
नहीं व्यर्थ बहाओ पानी
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श्याम सुन्दर अग्रवाल सदा हमें समझाए नानी, नहीं व्यर्थ बहाओ पानी । हुआ समाप्त अगर धरा से, मिट जायेगी ये ज़िंदगानी । नहीं उगेगा दाना-दुनका, ह...
चिड़िया
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श्याम सुन्दर अग्रवाल सुबह-सवेरे आती चिड़िया, आकर मुझे जगाती चिड़िया । ऊपर बैठ मुंडेर पर, चीं-चीं, चूँ-चूँ गाती चिड़िया । जाना है,नहीं स्कूल ...
चिड़िया और बच्चा
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श्याम सुन्दर अग्रवाल फर-फर करती आई चिड़िया, चोंच में तिनका लाई चिड़िया। जगह सुरक्षित उस को रख गई, नीड़ बनाने में वह लग गई । एक-एक तिनका खूब ...
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