पतंग
Thursday, December 3, 2015
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तीन कविताएँ डॉ • रामनिवास ‘ मानव ’ 1- हुई सुबह उठो मियाँ अब हुई सुबह , स्वच्छ धुली अनछुई सुबह। उठकर चन्दा –...
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Friday, October 30, 2015
दीवाली
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प्रकृति दोशी फिर से दीवाली आई संग लेकर खुशियाँ आई। घर - घर हो रही सफाई , फिर से दीवाली आई। अपने प्यारे घर में भी , ...
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Tuesday, October 20, 2015
दादी
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मंजूषा ‘ मन ’ छोड़ अपना गाँव पीपल की छाँव। दादी ने रखा था शहर में पाँव। भाई नहीं उनको यहाँ की हवा चल ही न पाई ये जीवन की ...
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