पतंग

Friday, October 30, 2015

दीवाली

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प्रकृति दोशी फिर से दीवाली आई संग लेकर खुशियाँ आई। घर - घर हो रही सफाई , फिर से दीवाली आई। अपने प्यारे घर में भी , ...
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Tuesday, October 20, 2015

दादी

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मंजूषा ‘ मन ’ छोड़ अपना गाँव पीपल की छाँव। दादी ने रखा था   शहर में पाँव। भाई नहीं उनको   यहाँ की हवा चल ही न पाई ये जीवन की ...
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Saturday, August 15, 2015

नन्हे शांतनु

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कमला निखुर्पा 1 नन्हा सिपाही चलने को तैयार   पहन वर्दी । 2 मासूम छवि मुखड़े में चंद्रमा नैनों मे...
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Sunday, August 9, 2015

बोल रे बादल

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  कमला निखुर्पा बोल रे बादल , बादल   बोल। तुम गरजो तो नाचे मोर गूगल से साभार जो हम गरजें तो मचता शोर टीचरजी हम पर गुर्...
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Tuesday, July 21, 2015

मेरी माँ

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जाह्नवी लाटियान , कक्षा 5 ( वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल , सैक्टर-13 रोहिणी , नई दिल्ली) मेरी माँ है सबसे न्यारी । मैं हूँ उसक...
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  • Kamlanikhurpa@gmail.com
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