पतंग
Thursday, December 27, 2007
पंछी
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मेरे आँगन में सवेरा
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मेरे आँगन में सवेरा
Thursday, December 20, 2007
सोनमछरिया
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रमेश तैलंग ताल में जी ताल में सोनमछरिया ताल में । मछुआरे ने मन्तर फूँका जाल गया पाताल में । थर-थर काँपा ताल का पानी फँसी जाल में मछली रानी...
Sunday, November 25, 2007
टालूराम
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नवीन सागर करना है दस दिन में काम हाँ! हाँ! बोले टालूराम। हमने कहा समझ लो काम बोले कभी समझ लेंगे हमने कहा करोगे कब वो जब चाहोगे तब पर पहले सम...
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Wednesday, November 14, 2007
आमंत्रण
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बालोपयोगी रचनाएँ आमंत्रित हैं। ई- मेल द्वारा कृतिदेव या यूनिकोड में रचनाएँ भेजे।मानदेय की व्यवस्था नहीं है। रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु...
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दो बाल कथाएँ
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:सुकेश साहनी ऊँचाई उदघाट्न समारोह में बहुत से रंगबिंरगे, खुबसूरत, गोल–मटोल गुब्बारों के बीच एक काला, बदसूरत गुब्बारा भी था, जिसकी सभी हँसी उ...
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Monday, November 12, 2007
5-कविताएँ
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रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' 1-मेरी नानी मेरी नानी अच्छी नानी बातें मैंने सारी मानी । रात हो गई मुझे सुनाओ परियों वाली एक कहानी। वही क...
Sunday, November 11, 2007
3-बाल कविताएँ
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अलका सिन्हा 1-लाल पतंग नीले- नीले आसमान में देखो उड़ती लाल पतंग। इक पतली सी डोर सहारे पूरब पश्चिम खूब निहारे देख हवा से होड़ लगाते रह जाते प...
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३-बाल–गीत
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– नवीन चतुर्वेदी 1- बंदर मामा धम्म धडाम बंदर कूदा डाली–डाली मारी एक छलांग , नीचे से गदहा चिल्लाया मामा मेरा सलाम। बंदर मामा ने सलाम को ज्यो...
Friday, November 9, 2007
दिया जलता रहे
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रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ यह ज़िन्दगी का कारवाँ ,इस तरह चलता रहे । हर देहरी पर अँधेरों में दिया जलता रहे ॥ आदमी है आदमी तब ,जब अँधेरों से लड़...
तनाव के त्रिभुज में घिरे बच्चे
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रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ आज का दौर तरह-तरह के तनाव को जन्म देने वाला है ,घर-परिवार ,कार्यालय ,सामाजिक परिवेश का वातावरण निरन्तर जटिल एवं त...
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