पतंग

Tuesday, December 16, 2008

DEFINITION OF EXCELLENCE

›
Excellence A man once visited a temple under construction where he saw a sculptor making an idol of God. Suddenly he noticed a similar ...
Saturday, November 22, 2008

खुशी : पंकज चतुर्वेदी

›
खुशी : पंकज चतुर्वेदी चित्रांकन :अजीत नारायण प्रकाशक :Pratham Books 930,4rth Cross Ist Main, MICO Layout,Stage 2,Bangalore 560076 बच्चों क...

चंदा और खरगोश :पंकज चतुर्वेदी

›
चंदा और खरगोश :पंकज चतुर्वेदी चित्रांकन :अजीत नारायण प्रकाशक :Pratham Books 930,4rth Cross Ist Main, MICO Layout,Stage 2,Bangalore 560076 चन...
Tuesday, November 18, 2008

कमज़ोर दृष्टिवाले बच्चे

›
कमज़ोर दृष्टि वाले बच्चे ( प्राथमिक विद्यालयोंके अध्यापकों के लिए एक संदर्शिका) लेखिका : अनीता जुल्का मूल्य :26 रुपए ,पृष्ठ :56, प्रकाशक :राष...

लौट के बुद्धू घर को आए

›
लौट के बुद्धू घर को आए:डॉ सरोजिनी प्रीतम पृष्ठ : 32 , मूल्य :25 रुपए। प्रकाशक: चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट नेहरू हाउस , 4 बहादुरशाह ज़फ़रमार्गनई दिल्ल...
Saturday, November 15, 2008

डॉ भावना कुँअर की बाल-कविताएँ

›
भावना कुँअर एक सहृदय कवयित्री हैं ।उनका यह सहृदय रूप उनके यात्रा संस्मरणों में भी मुखरित होता है ।बाल दिवस के अवसर पर उनकी सा...
Tuesday, November 11, 2008

देश हमारा है

›
देश हमारा है -रामेश्वर काम्बोज ' हिमांशु ' आँखों का तारा है ,प्राणों से प्यारा है । सब देशों से अच्छा , ये देश हमारा है ॥ इसका तन कु...
1 comment:
Tuesday, November 4, 2008

चिटकू : सुरेखा पाणंदीकर

›
चित्रांकन :मृणाल मित्र ;अनुवाद : मनमोहन पुरी पृष्ठ :24 ;मूल्य :20 रुपए प्रकाशक :चिल्ड्रन्स बुक ट्र्स्ट नेहरू हाउस ,4 बहादुरशाह ज़फ़र मार्ग नई ...
Monday, October 27, 2008

धरती हिन्दुस्तान की

›
धरती हिन्दुस्तान की -रामेश्वर काम्बोज ' हिमांशु '   जहाँ आकरके रही लौटती सेनाएँ तूफ़ान की। हमको प्राणों से भी प्यारी धरती हि...

बाल-कविता(हास्य)

›
बाल-कविता(हास्य) गधा आदमी से अच्छा -रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ छज्जू मास्टर एक रोज़ बच्चों को पढ़ा रहे थे॥ जो नहीं पढ़ पाता उसको मुर्ग़ा बना रहे...
1 comment:
Wednesday, September 17, 2008

नन्हीं कविताएँ

›
. - maorI naanaI maorI naanaI AcCI naanaI baatoM maOMnao saarI maanaI rat hao ga[- mauJao saunaaAao piryaaoM vaalaI ek khanaI vahI khanaI ba...
Saturday, July 12, 2008

अमृतमय हो जीवन

›
हरियाली छाई हो हर कदम पर सदा बने रिमझिम– रिमझिम फुहारों -सा जीवन । कहीं भी तपन न हो पथ में तुम्हारे हर पल हो सुखद बयारों का जीवन । पावन हों ...
Saturday, May 31, 2008

बाल कविता

›
कल्लू मोटा कल्लू मोटा ना है खोटा रखे हाथ में ,मोटा सोटा रोज़ नहाता ,भर भर लोटा । चन्दू भाई ,है हलवाई खुद ना खाता ,कभी मिठाई इसीलिए कोठी बन...
1 comment:
Monday, April 7, 2008

जब सूरज जग जाता है

›
जब सूरज जग जाता है रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ आँखें मलकर धीरे-धीरे सूरज जब जग जाता है । सिर पर रखकर पाँव अँधेरा चुपके से भग ...
‹
›
Home
View web version

Contributors

  • Kamlanikhurpa@gmail.com
  • कथाकार
  • सहज साहित्य
Powered by Blogger.