पतंग
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सर्दी की कविताएँ/नवीन चतुर्वेदी
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सर्दी की कविताएँ/नवीन चतुर्वेदी
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Saturday, February 9, 2008
चुनमुन
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–नवीन चतुर्वेदी सुबह हो गई, कोहरे की चादर फिर भी छाई है। चुनमुन ने सोते रहने की कसम उठाई है। अब जब सूरज उठा रहा है कोहरे की चादर तब चुनमुन क...
चूहे का सूट
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–नवीन चतुर्वेदी सर्दी पडी बहुत, चूहे ने अपना सूट सिलाया। दो कतरन ऊनी कपडे की चार रेशमी लाया। दर्जी बोला–‘‘समय नहीं है, कहीं और तुम जाओ, और क...
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जाडे का सूरज
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–नवीन चतुर्वेदी जाडे के मारे सूरज ने ओढ लिया कुहरा। मुर्गे ने जब बांग लगाई सूरज बन गया बहरा। आठ बजे के बाद दिखाया उसने अपना चेहरा । और शाम क...
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