पतंग

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Friday, May 15, 2009

नहीं व्यर्थ बहाओ पानी

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श्याम सुन्दर अग्रवाल सदा हमें समझाए नानी, नहीं व्यर्थ बहाओ पानी । हुआ समाप्त अगर धरा से, मिट जायेगी ये ज़िंदगानी । नहीं उगेगा दाना-दुनका, ह...

चिड़िया

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श्याम सुन्दर अग्रवाल सुबह-सवेरे आती चिड़िया, आकर मुझे जगाती चिड़िया । ऊपर बैठ मुंडेर पर, चीं-चीं, चूँ-चूँ गाती चिड़िया । जाना है,नहीं स्कूल ...

चिड़िया और बच्चा

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श्याम सुन्दर अग्रवाल फर-फर करती आई चिड़िया, चोंच में तिनका लाई चिड़िया। जगह सुरक्षित उस को रख गई, नीड़ बनाने में वह लग गई । एक-एक तिनका खूब ...
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  • Kamlanikhurpa@gmail.com
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