पतंग
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डॉ•रामनिवास ‘मानव’
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Thursday, December 3, 2015
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तीन कविताएँ डॉ • रामनिवास ‘ मानव ’ 1- हुई सुबह उठो मियाँ अब हुई सुबह , स्वच्छ धुली अनछुई सुबह। उठकर चन्दा –...
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