1-माँ की ममता/ अद्विका
राउत-कक्षा – चार
माँ की ममता जैसी मीठी,
न है कुछ भी दुनिया
में ऐसी।
रबड़ी, कुल्फी, आइसक्रीम,
चाहे जलेबी ही क्यों न हो वैसी।
माँ जितना भी है डाँटती,
उतना ही फिर स्नेह करती!
सारी दुनिया से लड़ जाती,
पर अपने बच्चे को बचाती!
बच्चे को बुखार हो जब-जब
रात-रात भर जागती रहती।
माँ तो भगवान है का रूप ,
माँ तो सबकी जननी है होती।
बचपन से लेकर,वृद्ध होने
तक
वही हमारा,सदा ध्यान है रखती।
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2-मेरे प्यारे पापा /हमसिका कुमारी-कक्षा चार
पापा वह छाँव है, जो धूप मे
साया है देते
बिना बोले ही हर दर्द को अपना
लेते।
न कभी माँगा कुछ, न कभी जताया,
चुपचाप हर ख्वाब हमारा सजाया।
डाँट मे उनकी छुपी होती है ममता,
उनकी सलाह में होती दुनिया की शिक्षा !
पापा है एक अहसास हिम्मत का है नाम
पापा मैं आपका सदा करती हूँ सम्मान ।
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अद्विका राउत की ‘माँ की ममता’ और हमसिका कुमारी की ‘मेरे प्यारे पापा’ दोनों बच्चों की कविताएँ बहुत सुंदर हैं । खूब लिखते रहो। अशेष शुभकामनाएँ । सुदर्शन रत्नाकर
ReplyDeleteअशेष धन्यवाद Ma'am 🙏
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Deleteअद्विका राउत की कविता माँ की ममता का सरल, निश्छल और हृदयस्पर्शी चित्रण है। रबड़ी, कुल्फी, जलेबी जैसे मीठे बिंब इसे बाल-सुलभ बनाते हैं। भाषा सहज, लय सरल और भाव गहरे हैं। डाँट में छिपा स्नेह और त्याग का भाव हर पाठक को अपने बचपन से जोड़ देता है।
ReplyDeleteपापा पर लिखी humsika की कविता मौन त्याग और अटूट सुरक्षा का सुंदर बखान है। 'धूप में साया' जैसा बिंब अत्यंत प्रभावी है। पिता की डाँट में ममता और सलाह में जीवन-शिक्षा को आपने बड़ी सहजता से पिरोया है। भाषा सरल, भाव गहरे और सम्मान से भरी यह रचना दिल को छूती है।
दोनों बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद।
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली
अशेष धन्यवाद आदरणीया वंदना जी 🙏
Deleteवहुत बढ़िया.- रीता प्रसाद
ReplyDeleteअशेष धन्यवाद आदरणीया रीता जी 🙏
Deleteहार्दिक धन्यवाद आदरणीय सर 🙏😊 मेरे बच्चों की कविताओं को स्थान देने हेतु 🙏😊 आपका आशीर्वाद सदा बना रहे.... 🙏🙇♀️
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